नम्रता ....... विनम्रता
हमें सदैव दूसरों के प्रति सकारात्मक रवैया रखना चाहिए। किसी का बुरा तो सपने में सोचना भी पाप है।
सदैव अपने जीवन में दूसरों का परोपकार करने की आदत बनाओ। यह भी कहा गया है कि गुण न हो तो रूप व्यर्थ है। विनम्रता न हो तो विद्या व्यर्थ है, उपयोग न हो तो पैसा व्यर्थ है। साहस न हो तो हथियार व्यर्थ है। होश न हो तो जोश व्यर्थ है। परोपकार ना हो तो जीवन ही व्यर्थ है। इसलिए हमें परोपकार करने का गुण जीवन में प्राथमिकता के आधार पर अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से कीट कपड़े को कुतर देता है, उसी तरह से ईष्र्या इंसान को। किसी से भी ईष्र्या नहीं करनी चाहिए। नम्रता एक ऐसा गहना है जो सब को अपने वश में कर लेता है। परिश्रम करने से हमें कभी घबराना नहीं चाहिए। मेहनत एक ऐसी चाबी है जो सब ताले खोल देती है। पक्षी सुबह होते ही काम पर चले जाते हैं तभी वे खुश रहते हैं। हमें जीवन में कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। झूठ एक ऐसा जहर है जो कि १०० अच्छाईयों को भी समाप्त कर देता है। पैसे का नहीं होना गरीबी नहीं है अपितु ज्ञान का न होना गरीबी है।
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